Thursday, August 18, 2011

नेताओं की नीयत देख वतन ख़ौफज़दा है

नेताओं की नीयत देख वतन ख़ौफज़दा है

बागवां की आदत जान चमन ख़ौफज़दा है


किसान की मेहनत तो पानी की नज़र हुई

मज़दूर के माथे का शिकन ख़ौफज़दा है


न बाप पर भरोसा न किसी भाई पर यकीन
आज अपने ही घर में बहन ख़ौफज़दा है

मासूमियत को जवानी का शिकार होना पड़ा
बच्चों का मासूम बचपन ख़ौफज़दा है

कैसी-कैसी शक्ल लोग इख़्तियार करते हैं
हैरां हैं मेरी आँखें दर्पण ख़ौफज़दा है

2 Comments:

सागर said...

किसान की मेहनत तो पानी की नज़र हुई
मज़दूर के माथे का शिकन ख़ौफज़दा है


सटीक शेर... उम्दा... सार्थक

vineet said...

nice one tripurari....today bhawnath introduced me about this blog...keep it up...good wishes...