नेताओं की नीयत देख वतन ख़ौफज़दा है
बागवां की आदत जान चमन ख़ौफज़दा है
किसान की मेहनत तो पानी की नज़र हुई
मज़दूर के माथे का शिकन ख़ौफज़दा है
न बाप पर भरोसा न किसी भाई पर यकीन
आज अपने ही घर में बहन ख़ौफज़दा है
मासूमियत को जवानी का शिकार होना पड़ा
बच्चों का मासूम बचपन ख़ौफज़दा है
कैसी-कैसी शक्ल लोग इख़्तियार करते हैं
हैरां हैं मेरी आँखें दर्पण ख़ौफज़दा है

2 Comments:
किसान की मेहनत तो पानी की नज़र हुई
मज़दूर के माथे का शिकन ख़ौफज़दा है
सटीक शेर... उम्दा... सार्थक
nice one tripurari....today bhawnath introduced me about this blog...keep it up...good wishes...
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