पीली धूप में नहाया हुआ एक पल
जैसे बारिश के बाद घास की कोंपल
जैसे खिलने को राजी कोई कली
जैसे पेड़ के बाजू में चाँद का टुकड़ा
कसमसाता रहता है सारी रात
और उसे देखकर तुम्हारा मचलना
तुम्हारी उंगलियों का मुझे इशारा करना
मुझमें अजीब-सा अनुभव भर देता है
तुम्हारी गीली-गीली स्याह-सी आँखें
छीनने लगती है मेरे होशो-हवास
गुम होने लगता हूँ तुम्हारी गंध में
अचानक अपने में जब लौटकर आता हूँ
पाता हूँ खुद को फूल से भरी वादी में
सामने पानी में पाँव रखता हुआ सूरज
जैसे तुम्हारी आँख का दूसरा किनारा
भरने लगता है अंधेरा मेरे बदन में
साँस की रफ़्तार ज़रा-सी तेज़ हो जाती है
सीने पर कोई पत्थर महसूस होता है
देख लेता हूँ कंधे पर एक ‘स्पर्श’
मुस्कुराती हुई सामने आती हो तुम
रेड टी-शर्ट और ब्लू जीन्स पहने हुए
इस पोशाक में भी तुम ‘हॉट’ लगती हो!
जैसे खिलने को राजी कोई कली
जैसे पेड़ के बाजू में चाँद का टुकड़ा
कसमसाता रहता है सारी रात
और उसे देखकर तुम्हारा मचलना
तुम्हारी उंगलियों का मुझे इशारा करना
मुझमें अजीब-सा अनुभव भर देता है
तुम्हारी गीली-गीली स्याह-सी आँखें
छीनने लगती है मेरे होशो-हवास
गुम होने लगता हूँ तुम्हारी गंध में
अचानक अपने में जब लौटकर आता हूँ
पाता हूँ खुद को फूल से भरी वादी में
सामने पानी में पाँव रखता हुआ सूरज
जैसे तुम्हारी आँख का दूसरा किनारा
भरने लगता है अंधेरा मेरे बदन में
साँस की रफ़्तार ज़रा-सी तेज़ हो जाती है
सीने पर कोई पत्थर महसूस होता है
देख लेता हूँ कंधे पर एक ‘स्पर्श’
मुस्कुराती हुई सामने आती हो तुम
रेड टी-शर्ट और ब्लू जीन्स पहने हुए
इस पोशाक में भी तुम ‘हॉट’ लगती हो!

6 Comments:
अच्छी अभिव्यक्ति !!
वाह, बहुत सुंदर ||
52nd टिप्पणी ||
वैवाहिक परिप्रेक्ष्य में विंडो, न दैन्यं न पला
रेड टी-शर्ट ब्लू जीन्स में, तनहा यह बड़ा खला
दीपक बाबा की बक बक से, होकर के तंग चला
गुम नदियों को पड़ा ढूँढना, दिल का जो अनल जला
लिंक आपकी रचना का है
अगर नहीं इस प्रस्तुति में,
चर्चा-मंच घूमने यूँ ही,
आप नहीं क्या आयेंगे ??
चर्चा-मंच ६७६ रविवार
http://charchamanch.blogspot.com/
वाह भाई कैसा रुमान सृजित कर दिया :)
आशा है आज चर्चा - मंच पर आप तशरीफ अवश्य लायेंगे |
पहले भी आपकी रचनाएं मंच पर स्थान प्राप्त कर चुकी हैं, परन्तु आपकी उदासीनता .......
हमारा उत्साह घटा रही है--
श्री संतोष चौधरी (बिहार) से पता चला था की आप एक सुलझे हुए इंसान हैं ||
आपका फालोवर हूँ मैं, आशा है हमारा उत्साह बढाने जरुर निकलेंगे अपनी सीमा से बाहर ||
सही है आज के जमाने के हिसाब से!
सुन्दर !
दिवाली कि हार्दिक शुभकामनाएं!
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